गरीबी से आई आई टी तक कहानी

एक गांव में एक किसान रहता था वह बहुत गरीब थे। उनके पास उतना ही खेत था जिनसे उतना ही पैसे हाथ आते थे। उनसे उनका घर नहीं चल पाता था। पर वह बहुत मेहनत करते थे।


कभी-कभी तो सब्जी की ठेला भी निकाल देते थे। और कोशिश करते थे अपने घर के लिए अपने फैमिली के लिए दो टाइम का खाना जुटा सके। इतना गरीबी के साथ जी रहे किसान के घर में उसके अलावा उसकी बीवी, उनकी बूढ़ी मां और बच्चे भी एक रूम वाले घर में रह रहे थे।



यह फैमिली गरीबी से लड़ रहा था। कुछ सालों बाद जब उनका सबसे बड़ा बेटा अमित जब पाँचवी आया तो उसकी मां ने उसे कहा देख बेटा तेरी पढ़ाई ही एक ऐसा रास्ता है जो हमें इस गरीबी से निकाल सकती है। प्लीज तुम अपनी पढ़ाई को बहुत सीरियसली लेना। हमारे पास और कोई ऑप्शन नहीं है।

 

इस गरीबी से निकलने के लिए, उस टाइम पर अमित समझ सकता था अपनी मां का दुःख और वो लाइन हर बार, हर समय उसकी  कानों में गूँजती थीं। उसने ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए और कुछ बनकर दिखाएगा अपनी फैमिली को इस गरीबी से निकालकर रहेगा।

 

वह  जैसे जैसे बड़ा होता रहा उनके  गांव में हाई स्कूल नहीं होने के कारण अमित को बाहर जाना पड़ता था। गरीबी में और थोड़ा खर्च बढ़ने के कारण उनके घर की हालत बिगड़ती जा रही थी। 


तभी उनके छोटे भाई ने  बाहर दिल्ली में जाकर कुछ काम करने का सोचा अपनी फैमिली को बताया और लेकिन बहुत कम उम्र के कारण सभी ने बाहर जाने से मना कर दिया। इतनी गरीबी और काम ना कर पाने के कारण धीरे-धीरे डिप्रेशन में चला गया,  उसका इलाज भी चालू हो गया पर वह इस मुसीबत से बाहर नहीं आ सका और कुछ टाइम बाद उसने इस गरीबी से छुटकारा पाने के लिए सुसाइड कर लिया।


 दोस्तों यह एक सच्ची कहानी है वह कोई बना बनाया बात नहीं कर रहा हूं। अमित को अब देखा नहीं जा रहा था ये सब गरीबी के कारण हो रहा था जो उनकी फैमिली सफर कर रहे थे, वो छोटा भाई भी खो चुका था, आप सोच सकते हो उनको कितना हर्ट हो रहा होगा कितना दुखी होगा। और उसने ठान लिया कि 10वी के बाद क्या करना है और क्या बनना है।

 

उसने आँसू को पोछ कर अपने आप से बोला अब मैं पीछे नही हठ सकता मेरे पास एक ही ऑप्शन है, वह पढ़ाई में लग गया और अच्छे रिजल्ट के साथ उसने 10वीं पास किया। उन्होंने अपने पिता से कहा उसे SUPER 30 के आनंद सर  से मिलना है। और वह दोनों उन्हें मिलने गए और उन्हें उस अकैडमी में एडमिशन भी मिल गया।


आनंद सर नोटिस किया करते थे। वो बहुत मेहनत करता था और उसे कहते थे थोड़ा आराम भी कर ले। 

 

उसने अपनी स्टोरी शेयर करते हुए कहा- जब में आराम करने का सोचता हूं तब मुझे मेरा भाई याद आता है, मुझे मेरी मां और पापा की गरीबी याद आती है, और वही गरीब और मेरे भाई की यादें मुझे सोने नहीं देती।मुझे आराम नहीं करने देते और धीरे-धीरे उसकी आंखों में से आंसू आ गया। अमित के सपना था कि वह आईआईटी में एडमिशन ले। 

 

   

 इतनी मेहनत के बाद कौन कहता है जो सोचो वह नहीं हो सकता है उन्होंने वो करके भी दिखाएं और अभी आज आईआईटी में पढ़ रहे हैं।


 हम आशा करते हैं कि वह लाइफ में बहुत आगे बढ़े यह स्टोरी कहानी आपके अंदर भी वह जज्बा है जो कुछ भी कर सकता है अपने लिए अपने माता-पिता के लिए या किसी ऐसे इंसान के लिए जो आपसे सबसे करीब है क्या आप इतना भी नहीं कर सकते उनके लिए।


अगर कर सकते हो तो इन्तजार किस बात का जब भी डिमोटिवेशन फील करो, इस कहानी को फिर से पढ़ लेना फिर से वही मोटिवेशन और जुनून आ जाएगा। 

वक़्त नूर को बेनूर बना देता है, वक़्त फ़कीर को हुज़ूर बना देता है…
वक़्त की कद्र कर ऐ बन्दे, वक़्त कोयले को कोहिनूर बना देता है…!!


         गांव के लड़के की कहानी

 एक गांव की लड़के की पैसों की कमी की वजह से दूर शहर में काम करने के लिए जाता है। उसके घरवालों का खर्चा पूरा ऊपर करने के लिए काफी दिनों तक काम की तलाश करता है। और आखिरकार उसे काम मिल ही जाता है।


 लड़का पूरी इमानदारी और मेहनत से अपना काम सारा दिन करता है कि देखकर उसका मालिक खुश हो जाता है कुछ महीने तक ईसी तरह चलता है। उसके बाद लड़का उसके मालिक को कहता है और मैं कुछ दिनों के लिए वापस अपने घर जाना चाहता हूं। 



 उस लड़के को पूरी उम्मीद थी कि घर जाने से  मालिक नहीं रोकेगा। लेकिन उस लड़के की सोच से भी परे उसका मालिक ने कहा नहीं तुम्हें 2 महीने का और थोड़ा काम करने है  इसके बाद तू अपने घर जा सकते हो,  लड़के को थोड़ा गुस्सा आता है लेकिन वह अपने गुस्से को बुझाकर के मालिक से पूछता है कि मालिक बताइए कौन सा काम है?


 मालिक कहता है मुझे एक घर खरीदना है तुम्हें जो अच्छा लगे वह तो मेरे लिए खरीद लो जैसे ही काम खत्म हो जाता है तुम अपने घर कुछ दिनों के लिए वापस जा सकते हो। गांव का लड़का खुश हो जाता है जल्दी-जल्दी खरीदने का काम खत्म कर देता है मालिक के पास जाता है और कहता है मालिक मैंने आपके लिए खरीद लिया है मालिक हैरान हो जाता है 10 दिनों में काफी बढ़िया है घर, मैं अपने घर जा सकता हूं।  


मालिक ने कहा है 2 दिनों के लिए तुम अपने घर वापस जा सकते हो। गांव का लड़का कहता है अरे मालिक मुझे गांव जाने के लिए 1 दिन लगेगा तो कैसे भला मैं 2 दिन में वापस आ जाओ मुझे मेरे परिवार के साथ वक्त बिताने है। मालिक खुश होकर अब तुम अपने परिवार के साथ ही रहोगे। जो घर में खरीदने को कहा था, वो तुम्हारे परिवार लिए मेरी तरफ से तोहफा है।


 गांव का लड़का खुश होने के बदले में नाराज हो जाता है और कहता है, मालिक आपने मुझे पहले ही बता दिया होता तो मैं थोड़ी और जानकारी प्राप्त करके अच्छा घर खरीदा। मालिक ने कहा तुमने तुम्हारा नुकसान किया है मैंने तुम्हें 2 महीने वक्त दिए थे।


 बस इसी तरह हमारे जिंदगी में यही होता है,  इस कहानी मैं जो मालिक था असल में वो वक्त होता है और हमेशा हम वक्त जाने के बाद कहते हैं अगर मुझे पता होता तो मैं और अच्छा करता इसलिए इसलिए अभी जिंदगी में जुुुनून के साथ कीजिए।

सच्चाई की जंग मे ,
कभी झूठे भी जीत जाते हैं
समय अपना अच्छा न हो तो ,
कभी अपने भी बिक जाते हैं ।


अब मैं आशा करता हूं कि आपको  success story अच्छा लगा होगा। अगर आपको छोटा छोटा प्रेरणादायक कहानी पढ़ना पसंद है तो आप सही जगह पर हैं हमारे success story in hindi for student प्रेरणादायक कहानियां पढ़ने  के लिए शुक्रिया।

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