जीवन है तो समस्याएँ आते रहेंगी Motivational Story in hindi

 

दोस्तों 

     जिंदगी और समस्याएं एक दूसरे के विपरीत है क्योंकि समस्याएं नहीं आएगी तो हम जिंदगी में कुछ अच्छा नहीं कर सकते, समस्या का समाधान के लिए ही हम मेहनत करते हैं।


कुछ लोग बैठे बैठे ही समस्या का समाधान ढूंढते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है उनके लिए संघर्ष करना पड़ता है, चलना पड़ता है, ठोकरें खानी पड़ती है, तब जाकर के हमें समस्या का समाधान मिलती है।


जीवन है तो समस्याएँ आते रहेंगी Motivational Story in hindi

जीवन है तो समस्याएँ आते रहेंगी



आइए इस आर्टिकल में हम  छोटी सी एक  कहानी के माध्यम से जानेंगे जिंदगी की समस्याएं से हम कैसे लड़ सकते हैं? अपने जिंदगी को प्रोफेशनल तरीके से कैसे जी सकते हैं?


जिंदगी जीनी है तो समस्याएं आएगी समस्याएं उन्हीं को आती है जो चलता है तो चलता ही नहीं है उन्हें समस्या कभी नहीं आती है। 


एक बार की बात है एक गांंव में एक गरीब किसान रहता था उनके पास थोड़ेे बहुत खेत था, उन में ही काम करके अपने और अपने परिवार बच्चों का भरण पोषण करते थे उस गरीब किसानों
के माता-पिता भी बहुत ही गरीब थे उन्होंने अपना बचपन से ही गरीबी देखते आया था और उनके लाइफ में हमेशा कुछ न कुछ समस्याएंं आती राती थे जैसे ही एक समस्या को सुलझातेे तब तक मैं दूसरी समस्या आ करके  खड़ा हो जाती।


उनके बच्चे भी बड़े हो चुके थे उनके स्कूल की फीस कभी उनके पोशाक तो कभी किताबे की कीमत में ढेर सारा रुपया लगने लगा था लेकिन बेचारा वह तो गरीब था सारा का भरण-पोषण करना उनके लिए धीरे-धीरे असंभव होते जा रहा था


वह अपनी जिंदगी से थक चुका था उन्हें कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कैसे मैं इन समस्या से छुटकारा पाऊंगा कभी-कभी तो डिप्रेशन में आकर के आत्महत्या करने का भी निर्णय ले लिया करते थे।


एक बार उनके गांव में बहुत बड़े संत आए जिन्होंने हजारों लोगों की जिंदगी बदली थी उस गरीब व्यक्ति भी उस संत के पास पहुंचे और उनके पास अपनी सारी समस्याएं सुनाई संत ने उनसे कहा इन समस्या का समाधान बहुत ही आसान है मैं इसे पलभर में ही तुझ से छुटकारा दिला दूंगा गरीब व्यक्ति बहुत खुश हुआ संत ने उन्हें सुबह सवेरे अपने कुटिया में आने को कहा।


व्यक्ति ठीक समय पर सुबह उनके पास पहुंच जाता है। संत ने उन्हें अपने साथ नदी के उस पार चलने को कहा- व्यक्ति खुशी-खुशी संत के पीछे पीछे नदी के पास पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद संत नदी के किनारे में जाकर बैठ गया व्यक्ति भी वहीं पर आराम करने लगता है 

उन्हें लगा संत को लेने के लिए उस पार से कोई आ रहे होंगे। व्यक्ति इंतजार करने लगे कि संत को लेने कोई आ रहे हैं 3-4 घंटे बैठने के बाद वहां पर कोई नहीं पहुंचे व्यक्ति के मन में ऐसा प्रश्न आ रहा था मैं तुमसे पूछता हूं और कितना देर लगेगा। 


लेकिन उन्हें पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी नदी के किनारे 8 से 10 घंटे बैठने के बाद आखिरकार व्यक्ति ने पूछ ही लिया- हमें कौन लेने के लिए आ रहे हैं हम किनका इंतजार कर रहे हैं संत कहते हैं मैं किसी का इंतजार नहीं कर रहा हूं बल्कि नदी का पानी सूखने का इंतजार कर रहा हूं, 


साधु ने उन्हें समझाते हुए कहा- बेटा समस्या नदी का पानी है इसे सूखने का इंतजार करो यह सूख जाएगा इसके बाद हम लोग आराम से नदी के उस पार चले जाएंगे।

नदी का पानी सूखता है कभी कैसी मूर्खता की बातें कर रहे हैं। नदी का पानी कभी नहीं सूखता है।


 मैं तो तुम्हें यही समझाने के लिए बैठा हूं जिस तरह से नदी का पानी कभी नहीं सूखता उसी तरह से जीवन  में समस्याएंं कभी खत्म नहीं होती।


 हमारा जीवन नदी की तरह है और समस्याएं बहती हुई पानी की तरह है।

बेटा समस्या नदी की पानी की तरह जाती रहती है तुझे उनका डटकर सामना करना पड़ेगा किनारे बैठे रहने से कुछ भी नहीं होगा सिर्फ और सिर्फ समय का बर्बादी होगा।

नदी की धारा को चीरते हुए हमें उस पार जाना होगा इसके बाद हम नदी के उस किनारे पर पहुंचेंगे उसी तरह से तुम्हें समस्याओं से लड़ना होगा जीवन में कभी समस्याएं खत्म नहीं होती है हमें समस्याओं से लड़ते हुए बाहर निकलने पड़ते हैं।


शिक्षा- इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है हमें चिंता नहीं करनी चाहिए कि मेरा समस्या कब खत्म होगा बल्कि उनका डटकर सामना करना होगा समस्या नदी में बहती हुई पानी की तरह होती है जैसे नदी की पानी कभी खत्म नहीं होती जीवन है तो समस्याएं भी कभी खत्म नहीं होगी।


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