सुख पाना है तो दर्द को सहना पड़ेगा(If you want to be happy, you will have to bear the pain.)

दोस्तों 
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कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है

आज हम एक छोटी सी कहानी के माध्यम से आप लोगों को बताता हूं कैसे कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है
 आप कहानी को पूरा पढ़ें....

जिंदगी बदल देने वाली तो पत्थर की कहानी

एक मूर्तिकार को एक पंडित ने मूर्ति बनाने का ऑर्डर दिया। मूर्तिकार एक घना जंगल गया और वहां साथ दो बड़े-बड़े पत्थर भी ले गया। उसने मूर्ति बनाना शुरू किया, जैसे ही पत्थर पर हथौड़े की चोट पड़ी पत्थर बोल पड़ा बहुत दर्द हो रहा है, मुझे छोड़ दो। मूर्तिकार ने उसे छोड़ दिया। मूर्तिकार पुनः दूसरे पत्थर पर हथौड़े का चोट देना शुरू किया, दूसरे पत्थर से पूछा दर्द भी हो रहा है, 



पत्थर ने जवाब दिया हां लेकिन मैं इतना सा सकता हूं। मूर्तिकार ने अपने हथौड़े की चोट दे दे कर दूसरे पत्थर को मूर्ति के रूप में बदल दिया। कुछ  दिन बाद जैसे ही पंडित मूर्ति लेने के लिए मूर्तिकार के पास पहुंचा। तो उनके सामने एक खूबसूरत सा मूर्ति बना पड़ा था। उन्होंने मूर्तिकार से मूर्ति ले लिया उन्होंने देखा उसी के बगल में एक पत्थर पड़ा है पंडित ने मूर्तिकार से कहा मुझे यह पत्थर भी दे दो। 

 मूर्तिकार ने हंसते हुए पूछा- यह पत्थर का क्या करोगे। तो पंडित जी बोल पड़े जब पुजारी मंदिर पूजा करने आते हैं तो प्रसाद। में नारियल भी लाते है। जिसे फोड़ने में बहुत ही परेशानी होता है। मंदिर के बाहर इस पत्थर को स्थापित कर दूंगा। पुजारी इसी पत्थर पर पटक पटक के नारियल फोड़ लेंगे।



           तपना तो पड़ेगा

मूर्ति को बहुत ही खूबसूरत सा एक मंदिर में स्थापित कर दिया गया, और उसी मंदिर के बाहर उस पत्थर को भी रख दिया गया। अब मंदिर का पूजा होने लगा। मूर्ति के आगे मिठाई फल फूल रोज़ पुजारी चढ़ाया करते थे। और उनके सामने जो पत्थर पड़ा था। उन पर कोई पुजारी आता जोर से नारियल पटकता और नारियल फोड़ता। हर एक आधे घंटे पर कोई न कोई उस पर चोट देता ही रहता था।
          



जब चिड़िया चुग गई खेत तब पछताए तो होत क्या

उस मूर्ति ने उस पत्थर से कहा- यदि आज तुम भी दर्द सह लिया होता तो आज तुझे हमेशा ठोकर नहीं खाने पड़ते, चोट नहीं खाने पड़ते। तो अब पत्थर को समझ में आने लगा काश यदि मैं भी थोड़ा दर्द सा लिया होता तो आज मेरी ऐसी नौबत नहीं आती ।

        

 इसी तरह हम लोग में जीवन में जो समय पर ठोकरें खाता है गिरता है टूटता है बिखरता है और पुनः संभल के आगे की ओर बढ़ता है वह एक रोज जरूर चमकता है लेकिन जो रास्ते में ही बिखरे रह जाता है पुनः संभल नहीं पाता है उन्हीं के जीवन में अंधेरा  छा जाता है
कहानी समय सीख मिलती है जीवन में कितना भी ठोकर खाने पड़े कितना भी टूटना पड़े। लेकिन अपने दर्द को चाह कर भी अपनी मंजिल को पाना है।

दोस्तों 
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