कुछ कहने से पहले सोचना क्यों जरूरी होता है?

दोस्तों मैं बम बम आप सभी का स्वागत करता हूं।
आप लोगों ने मेरा पिछले आर्टिकल पर बहुत अच्छा खासा प्यार दिया बहुत अच्छे अच्छे कमेंट आए। मैंने सारे कमेंट का रिप्लाई भी दिया हूं, आप लोग इसी तरह से सपोर्ट और प्यार देते रहें।
अभी के दौड़ में किसी को कुछ कहने में दो सेकंड भी नहीं लगता हैं।
अक्सर लोगों को बुराई करना अच्छा लगता है, पहले किसी इंसान के बारे में नहीं सोचता यदि मैं इनका बुराई करूंगा  तो हो सकता है खुद ब खुद मेरा ही बुराई हो जाए।
इसलिए दोस्तों कभी भी किसी को कुछ कहने  से पहले कुछ बोलने से पहले उनके बारे में सोचिए। इसी में बुरा कह कर खुद का सिर नीचे ना कर लो।
इसे मैं एक छोटी सी कहानी से समझाना चाहता हूं तो आप आर्टिकल को पूरा पढ़े।

  • कुछ बोलने से पहले उनके बारे में सोचिए


यह कहानी है एक 24 साल की लड़का की।वह ट्रेन की खिड़की पर बैठकर बाहर की ओर देख रहा था, और पापा से कहा पापा देखो सारे पेड़ पीछे जा रहे हैं। उसके पिता ने मुस्कुराया, उसके बगल में बैठा एक आदमी सोच ही रहा था, तभी बच्चा फिर से बोला। अरे पापा देखो सारे बादल हमारे साथ जा रहे हैं। और पास में बैठा आदमी अपने आप को रोक नहीं पाया, और बैठे उस व्यक्ति से कहा अपने बेटे को डॉक्टर के पास क्यों नहीं ले जाते? उस व्यक्ति ने उस व्यक्ति की ओर देखा और धीरे से मुस्कुराया, और का कहा जी हां मैं इसे डॉक्टर के पास से ही आ रहा हूं। जब पैदा हुआ तब से ही यह अंधा था देख नहीं पाता था। आज ही से नई आंखें मिली है। पास बैठे आदमी की आंखों में आंसू आ गया और खुद पर हंसने लगा,
और शर्मिंदा हो। गए इस पृथ्वी पर हर एक इंसान का अपना एक past होता है, पहले उसके बारे में जाने पुनः उसे अपना अनमोल वचन से बोलो नहीं तो वहां आपकी बेज्जती हो सकती है।
             


   धक्का  खाना भी जरूरी है...

इसलिए दोस्तों, किसी के बारे में कुछ कहने से पहले सोचिए ना कि उसे सीधा बोल दीजिए, हो सकता आप जो बोलेंगे वह गलत ही साबित हो और वहां आपकी बेइज्जती हो जाए।

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